Saturday, May 2, 2009

सच्चा दोस्त

सच्चा दोस्त _____________________
हम भी सदा ख्वाब देखते हैंदोस्तों को हरदम साथ देखते हैंजब भी जी चाहे उनसे मिलन का दिल से दिल के तार जोड़ते हैं.यादों की सुनहरी सीढियों पर चढ़करजमीन के जर्रों मे चाँद देखते हैं.हमने कुछ भी न खोया यहाँ परजो भी मिला उसका इतिहास खोजते हैं.तुम से जो साथी हमको मिले हैंखुदा को इसका शुक्रिया भेजते हैं.जब भी जी चाहे तुमसे मिलन कानजरें झुकाकर दिल मे देखते हैं.मित्रता की लौ को आगे बढ़ानानए मित्र बंधू जीवन मे लानाविचारों की अच्छी समाँ तुम जलानाख़्वाबों को सदा जीवन मे सजाना.डॉ अ.किर्तिवर्धन
सच्चाई का परिचय पत्र _________________
सूरज तुम सूरज होतुमहे बताना होगाअपना परिचय पत्र दिखाना होगा.जीवित हो या मरे हुए होयह भी बतलाना होगाजीवित रहने का साक्ष्य भी स्वयं जुटाना होगा.अनेक सूर्य अन्तरिक्ष मे डोल रहे हैंवैज्ञानिक नित नए रहस्य खोल रहे हैंऐसा न होकुछ रिश्वत न देने के चक्कर मेतुमको अपना देवत्व गवाना होगा.सूरज तुम सूरज होतुम्हे बताना होगा.अनंत काल से ऊर्जा केतुम स्रोत्र बने होहनुमान के भी तुम एक बार भोग बने हो.स्रष्टि का कण कण जिससे आह्लादित होजिसकी गर्मी का मूल्यांकनकोई नहीं कर सकता हो,उसकी शक्ति कोमानव ने ललकारा हैतुम्हारे विरूद्वएक दुश्प्रसार चलाया हैतुम्हारी ऊष्मा को हीउसका आधार बनाया है.तमको अपना प्रचंड रूप दिखाना होगाअपनी शक्ति का मानव कोभान कराना होगा.सूरज तुम सूरज होतुम्हे बताना होगासच्चाई का परिचय पत्रदिखाना होगा.डॉ अ कीर्तिवर्धन

सच्चाई का परिचय पत्र

समर्पण

कर दीजिये पूर्ण समर्पण
अंहकार का
अपने प्रभु के सामने
देखिये फिर कृपा उसकी
क्या मिले संसार मे।
सबसे पहले शान्ति मिलती
फिर मिलता खजाना
संतोष का,
जब त्यागी परनिंदा तूमने
प्रभु भक्ति का संग मिला।
क्या खोया,क्या पाया
समर्पण मे ना विचारिये
व्यापार नही है प्रभु भक्ति
बस देने का भाव लाईये।

डॉ.अ.कीर्तिवर्धन

Wednesday, November 5, 2008

अवसरवादी

जो गद्दार हैं
अपने आप को
अवसरवादी बता रहे हैं
अर्थात
शब्दों के खेल में
अपनी
असलियत छिपा रहे हैं।
ऐसे ही लोग
देश के रहनुमा बनते जा रहे हैं।

Tuesday, October 7, 2008

छोटी सी चिंगारी

अमावस्या के गहन अन्धकार मे
छोटे छोटे दीप जलाना
मानव का सपना होता है
अन्धकार को पूर्ण मिटाना।
एक छोटी सी चिंगारी
अन्धकार की हँसी उडाती है
दूर कहीं से दिख जाती है
आशा की राह बताती है।
अन्धकार अपने यौवन पर
चिंगारी का शैशव है
फिर भी वह न जीत सका
यह अच्छाई का गौरव है।
जीवन के हर पल मे तुम भी
नैतिकता के दीप जलाओ
निराश भाव को दूर भगा कर
घर घर मे उजियारा लाओ।
भ्रष्ट आचरण की आंधी मे
सच्चाई की जोत जलाकर
अपने उत्तम कार्यों द्बारा
अच्छाई को अमित बनाओ.
सुख समृधि की अभिलाषा मे
पाप को तुम न गले लगाओ
अच्छाई की चिंगारी बनकर
भटको को तुम राह दिखाओ।
मानव का सपना पूरा करने को
shiksha के तुम दीप जलाओ
अ ज्ञान को पूर्ण मिटा कर
राम राज को फिर ले aao.

Monday, October 6, 2008

कलियुग मे भगवान

त्रेता युग मे राम हुए थे
रावण का संहार किया
द्वापर मे श्री कृष्ण आ गए
कंस का बंटाधार किया ।
कलियुग भी है राह देखता
किसी राम कृष्ण के आने की
भारत की पावन धरती से
दुष्टों को मार भगाने की।
आओ हम सब राम बनें
कुछ लक्ष्मण सा भाव भरें
नैतिकता और बाहुबल से
आतंकवाद को खत्म करें।
एक नहीं लाखों रावण हैं
जो संग हमारे रहते
दहेज -गरीबी- अ शिक्षा का
कवच चढाये बैठे हैं।
कुम्भकरण से नेता बैठे
स्वार्थों की रुई कान मे डाल
मारीच से छली अनेकों
राष्ट्र प्रेम का नही है ख्याल ।
शीघ्र एक विभिक्षण ढूँढो
नाभि का पता बताएगा
देश भक्ति के एक बाण से
रावण का नाश कराएगा।

आप सब को दशहरे के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभ कामनाएँ ।

अ.कीर्ति वर्धन