होली के शुभ अवसर पर शुभकामनाएं तथा एक सन्देश
देश प्रेम
खून की होली मत खेलो
प्यार के रंग मे रंग जाओ.
जात-पात के रंग न घोलो
मानवता मे रंग जाओ.
भूख-गरीबी का दहन करो
भाई चारे मे रंग जाओ.
अहंकार की होली जलाकर
विनम्रता मे रंग जाओ.
ऊँच-नीच का भेद खत्म कर
आओ गले से मील जाओ.
होली पर्व का यही संदेशा
देश प्रेम मे रंग जाओ.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
०९५५५०७४२०४,09911323732
Saturday, February 27, 2010
Tuesday, February 2, 2010
भारतीय नव वर्ष
दोस्तों,स्रष्टि का प्रथम दिवस यानि जहाँ से दुनिया की गणना शुरू होती है,वह है भारतीय स्रष्टि संवत.यह १९७२९४९१११ वर्ष यानि एक अरब सतनावें करोड़,उनतीस लाख उनचास हज़ार एक सौ ग्यारह वर्ष पुराना है.यह गणना १६ मार्च २०१० अर्थात विक्रम संवत २०६७ तक है.
भारतीय कैलेंडर का निर्माण सूर्य,चन्द्रमा.तथा अन्य ग्रहों की चाल पर आधारित है,किसी राजा (जैसा की अंगेरजी कैलेंडर मे है)के जन्म दिन या उसकी मर्ज़ी पर आधारित नहीं है.
हमारे कैलेंडर मे दिन,महीने आदि के नाम भी नक्षत्रों की गति पर ही आधारित तथा पूर्णतया वैज्ञानिक हैं.
जो लोग टेलीविजन पर स्रष्टि ख़त्म होने की बात करते हैं,उन्हें बताना चाहता हूँ कि भारतीय गणनाओं के अनुसार अभी स्रष्टि ख़त्म होने मे ४ लाख, २६ हज़ार, ८६५ वर्ष, कुछ महीने, कुछ पक्ष, कुछ सप्ताह, कुछ दिन, कुछ प्रहर, कुछ घटिकाएं,कुछ पल,कुछ विपल बाकी हैं.
भारतीय नव वर्ष का प्रारंभ सूर्योदय कि प्रथम किरण के साथ चैत्र मॉस शुक्ल प्रतिपदा से होता है.इस वर्ष यह शुभ अवसर १६ मार्च २०१० को है.अतः आप सब १६ मार्च २०१० को नव वर्ष का स्वागत अपने इष्ट देव तथा बुजुर्गों के आशीर्वाद के साथ शुरू करें.
अगर आपको मेरा यह सन्देश अच्छा लगे तथा उचित लगे तो अन्य मित्रों को भी भेजने कि कृपा करें.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
०९९११३२३७३२,०९५५५०७४२०४,०१३१२६०४९५०
a.kirtivardhan@gmail.com
a.kirtivardhan@rediffmail.com
kirtivardhan.blogspot.com
www.samaydarpan.com
भारतीय कैलेंडर का निर्माण सूर्य,चन्द्रमा.तथा अन्य ग्रहों की चाल पर आधारित है,किसी राजा (जैसा की अंगेरजी कैलेंडर मे है)के जन्म दिन या उसकी मर्ज़ी पर आधारित नहीं है.
हमारे कैलेंडर मे दिन,महीने आदि के नाम भी नक्षत्रों की गति पर ही आधारित तथा पूर्णतया वैज्ञानिक हैं.
जो लोग टेलीविजन पर स्रष्टि ख़त्म होने की बात करते हैं,उन्हें बताना चाहता हूँ कि भारतीय गणनाओं के अनुसार अभी स्रष्टि ख़त्म होने मे ४ लाख, २६ हज़ार, ८६५ वर्ष, कुछ महीने, कुछ पक्ष, कुछ सप्ताह, कुछ दिन, कुछ प्रहर, कुछ घटिकाएं,कुछ पल,कुछ विपल बाकी हैं.
भारतीय नव वर्ष का प्रारंभ सूर्योदय कि प्रथम किरण के साथ चैत्र मॉस शुक्ल प्रतिपदा से होता है.इस वर्ष यह शुभ अवसर १६ मार्च २०१० को है.अतः आप सब १६ मार्च २०१० को नव वर्ष का स्वागत अपने इष्ट देव तथा बुजुर्गों के आशीर्वाद के साथ शुरू करें.
अगर आपको मेरा यह सन्देश अच्छा लगे तथा उचित लगे तो अन्य मित्रों को भी भेजने कि कृपा करें.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
०९९११३२३७३२,०९५५५०७४२०४,०१३१२६०४९५०
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Sunday, January 24, 2010
tiranga
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाऐं.
तिरंगा
तीन रंग मे रंगा हुआ है मेरे देश का झंडा
केसरिया,सफ़ेद और हरा,मिलकर बना तिरंगा.
इस झंडे की अजब गजब ,तुम्हे सुनाएँ कहानी
केसरिया की शान है जग मे,युगों युगों पुरानी.
संस्कृति का दुनिया मे,जब से है आगाज़ हुआ
केसरिया तब से ही है,विश्व विजयी बना हुआ.
शांति का मार्ग बुद्ध ने,सारे जग को दिखलाया
धवल विचारों का प्रतीक,सफ़ेद रंग ही कहलाया.
महावीर ने सत्य अहिंसा,धर्म का मार्ग बताया
शांत रहे संपूर्ण विश्व,सफ़ेद ध्वज फहराया.
खेती से भारत ने सबको,उन्नति का मार्ग बताया
हरित क्रांति जग मे फैली,हरा रंग है आया.
वसुधैव कुटुंब मे कोई,कहीं रहे न भूखा
मानवता जन जन मे व्यापे,नहीं बाढ़,नहीं सुखा.
अशोक महान हुआ दुनिया मे,धर्म सन्देश सुनाया
सावधान चौबीसों घंटे,चक्र का महत्व बताया.
नीले रंग का बना चक्र,हमको संदेशा देता
नील गगन से बनो विशाल,सदा प्रेरणा भरता.
तिरंगा है शान हमारी,आंच न इस पर आये
अध्यातम भारत की दें,विजय धवज फहराए.
डॉ.अ.कीर्तिवर्धन
09911323
kirtivardhan.blogspot.com
a.kirtivardhan@gmail.com
तिरंगा
तीन रंग मे रंगा हुआ है मेरे देश का झंडा
केसरिया,सफ़ेद और हरा,मिलकर बना तिरंगा.
इस झंडे की अजब गजब ,तुम्हे सुनाएँ कहानी
केसरिया की शान है जग मे,युगों युगों पुरानी.
संस्कृति का दुनिया मे,जब से है आगाज़ हुआ
केसरिया तब से ही है,विश्व विजयी बना हुआ.
शांति का मार्ग बुद्ध ने,सारे जग को दिखलाया
धवल विचारों का प्रतीक,सफ़ेद रंग ही कहलाया.
महावीर ने सत्य अहिंसा,धर्म का मार्ग बताया
शांत रहे संपूर्ण विश्व,सफ़ेद ध्वज फहराया.
खेती से भारत ने सबको,उन्नति का मार्ग बताया
हरित क्रांति जग मे फैली,हरा रंग है आया.
वसुधैव कुटुंब मे कोई,कहीं रहे न भूखा
मानवता जन जन मे व्यापे,नहीं बाढ़,नहीं सुखा.
अशोक महान हुआ दुनिया मे,धर्म सन्देश सुनाया
सावधान चौबीसों घंटे,चक्र का महत्व बताया.
नीले रंग का बना चक्र,हमको संदेशा देता
नील गगन से बनो विशाल,सदा प्रेरणा भरता.
तिरंगा है शान हमारी,आंच न इस पर आये
अध्यातम भारत की दें,विजय धवज फहराए.
डॉ.अ.कीर्तिवर्धन
09911323
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Friday, January 1, 2010
कवायद
कवायद
जब जब जिंदगी में हादसे देखा करता हूँ
भगवान में अधिक विश्वास करने लगता हूँ
जाने किस गुनाह की सजा किसको मिली है
मैं संभल संभल कर चलने लगता हूँ.
क्या है मकसद जीने का,मैं नहीं जानता
पर गुनाहों से तौबा किया करता हूँ.
उलझ कर दुनियां के झमेलों में,इंसान न बन सका
पर आदमी बनने की कवायद किया करता हूँ.
आदमी मिलना भी नहीं आसान यहाँ है
दरिंदों की भीड़ में आदमी खोजा करता हूँ.
जानवरों को देते हैं वो गालियाँ अक्सर
मैं जानवरों में भी इन्सान खोजा करता हूँ.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
०९९११३२३७३२
a.kirtivardhan@gmail.com
kirtivardhan.blogspot.com
www.samaydarpan.com (e magazine)
जब जब जिंदगी में हादसे देखा करता हूँ
भगवान में अधिक विश्वास करने लगता हूँ
जाने किस गुनाह की सजा किसको मिली है
मैं संभल संभल कर चलने लगता हूँ.
क्या है मकसद जीने का,मैं नहीं जानता
पर गुनाहों से तौबा किया करता हूँ.
उलझ कर दुनियां के झमेलों में,इंसान न बन सका
पर आदमी बनने की कवायद किया करता हूँ.
आदमी मिलना भी नहीं आसान यहाँ है
दरिंदों की भीड़ में आदमी खोजा करता हूँ.
जानवरों को देते हैं वो गालियाँ अक्सर
मैं जानवरों में भी इन्सान खोजा करता हूँ.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
०९९११३२३७३२
a.kirtivardhan@gmail.com
kirtivardhan.blogspot.com
www.samaydarpan.com (e magazine)
Saturday, November 28, 2009
ख्वाब
ख्वाब
ख्वाब ही हैं जो जिंदगी को
जीना सिखा देते हैं
ख्वाब ही हैं जो मौत से भी
लड़ना सिखा देते हैं
आप तो बस टूटे हुए
ख्वाबों की बात करते हो
हम टूटे हुए ख्वाब को भी
ख्वाब में मुकम्मल बना देते हैं.
हम ख्वाब देखते हैं मगर
हकीकत में जिया करते हैं
ख्वाब को मंजिल नहीं,
रास्ता कहा करते हैं.
आप ख्वाब देखकर बस
ख्यालों में खो जाते हो
हम ख्यालों को भी ख्वाब में
हकीकत बनाया करते हैं.
डॉ अ किर्तिवर्धन
09911323732
ख्वाब ही हैं जो जिंदगी को
जीना सिखा देते हैं
ख्वाब ही हैं जो मौत से भी
लड़ना सिखा देते हैं
आप तो बस टूटे हुए
ख्वाबों की बात करते हो
हम टूटे हुए ख्वाब को भी
ख्वाब में मुकम्मल बना देते हैं.
हम ख्वाब देखते हैं मगर
हकीकत में जिया करते हैं
ख्वाब को मंजिल नहीं,
रास्ता कहा करते हैं.
आप ख्वाब देखकर बस
ख्यालों में खो जाते हो
हम ख्यालों को भी ख्वाब में
हकीकत बनाया करते हैं.
डॉ अ किर्तिवर्धन
09911323732
Sunday, November 15, 2009
चाहत १९७७ मे लिखी रचना
चाहत
तू ऐसे आज नज़र आई
जैसे हो भोर अँधेरे की
तुझको गर दीपक मानूं तो
में कीट पतंगा बन जाऊं
तुझको गर साकी मानूं तो
में एक प्याला बन जाऊं
तू बन जाए गर हरियाली
में कीट पतंगा बन जाऊं
तू स्वर्ग लोक को जाए तो
में साधू कोई बन जाऊं
तू नरक लोक को जाए तो
में पापी कोई बन जाऊं
तू कहीं नज़र न आये तो
में आंसू बन कर बह जाऊं.
डॉ अ किर्तिवर्धन
तू ऐसे आज नज़र आई
जैसे हो भोर अँधेरे की
तुझको गर दीपक मानूं तो
में कीट पतंगा बन जाऊं
तुझको गर साकी मानूं तो
में एक प्याला बन जाऊं
तू बन जाए गर हरियाली
में कीट पतंगा बन जाऊं
तू स्वर्ग लोक को जाए तो
में साधू कोई बन जाऊं
तू नरक लोक को जाए तो
में पापी कोई बन जाऊं
तू कहीं नज़र न आये तो
में आंसू बन कर बह जाऊं.
डॉ अ किर्तिवर्धन
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