Sunday, August 15, 2010

तिरंगा

स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं
तिरंगा
तीन रंग मे रंग हुआ है,मेरे देश का झंडा
केसरिया,सफ़ेद और हरा,मिलकर बना तिरंगा.
इस झंडे की अजब गजब,तुम्हे सुनाऊं कहानी
केसरिया की शान है जग मे,युगों-युगों पुरानी.
संस्कृति का दुनिया मे,जब से है आगाज़ हुआ
केसरिया तब से ही है,विश्व विजयी बना रहा.
शान्ति का मार्ग बुद्ध ने,सारे जग को दिखलाया
धवल विचारों का प्रतीक,सफ़ेद रंग कहलाया.
महावीर ने सत्य,अहिंसा,धर्म का मार्ग बताया
शांत रहे सम्पूर्ण विश्व,सफ़ेद धवज फहराया.
खेती से भारत ने सबको,उन्नति का मार्ग बताया
हरित क्रांति जग मे फैली,हरा रंग है आया.
वसुधैव कुटुंब मे कोई.कहीं रहे न भूखा
मानवता जन-जन मे व्यापे,नहीं बढ़ नहीं सुखा.
अशोक्माहन हुआ दुनिया मे,धर्म सन्देश सुनाया
सावधान चोबिसों घंटे,चक्र का महत्व बताया.
नीले रंग का बना चक्र,हमको संदेशा देता
नील गगन से बनो विशाल,सदा प्रेरणा भरता.
तिरंगा है शान हमारी,आंच न इस पर आये
अध्यात्म भारत की देन,विजय धवज फहराए.

डॉ.अ.कीर्तिवर्धन
09911323732

Saturday, August 14, 2010

गंगा

गंगा

जिसमे तर्पण करते ही पुरखें भी त़िर जाते हैं
मानव की तो बात है क्या,देव भी शीश झुकाते हैं.
मैं गंगा हूँ
मेरा अस्तित्व
कोई नहीं मिटा सकता है.
मैं ब्रह्मा के आदेश से
स्रष्टि के कल्याण के लिए उत्तपन हुई.
ब्रह्मा के कमंडल मे ठहरी
भागीरथ की प्रार्थना पर
आकाश से उतरी.
शिव ने अपनी जटाओं मे
मेरे वेग को थामा,
गौ मुख से निकली तो
जन-जन ने जाना.
मैं बनी हिमालय पुत्री
मैं ही शिव प्रिया बनी
धरती पर आकर मैं ही
मोक्ष दायिनी गंगा बनी.
मेरे स्पर्श से ही
भागीरथ के पुरखे तर गए
और भागीरथ के प्रयास
मुझे भागीरथी बना गए.
मैं मचलती हिरनी सी
अलखनंदा भी हूँ.
मैं अल्हड यौवना सी
मन्दाकिनी भी हूँ.
यौवन के क्षितिज पर
मैं ही भागीरथी गंगा बनी हूँ.
मैं कल-कल करती
निर्मल जलधार बनकर बहती
गंगा
हाँ मैं गंगा हूँ.
दुनिया की विशालतम नदियाँ
खो देती हैं
अपना वजूद
सागर मे समाकर.
और मैं गंगा सागर मे समाकर
सागर को भी देती हूँ नई पहचान
गंगा सागर बनाकर.

डॉ अ कीर्तिवर्धन.
9911323732

Sunday, August 8, 2010

आओ एक इतिहास रचाएं

आओ एक इतिहास रचाएं
अमावस्या के गहन अंधकार मे
आशाओं के दीप जलाकर
इस धरती पर स्वर्ग बनायें
आओ एक इतिहास रचाएं.
एक बालक को शिक्षित करके
शिक्षा का एक दीप जलाकर
शिक्षित भारत देश बनायें
आओ एक इतिहास रचाएं.
इस धरती पर वृक्ष लगाकर
धरती माँ को गहने पहनाकर
प्रदुषण को दूर भगाएं
आओ एक इतिहास रचाएं.
युद्ध उन्मादी लोगों को भी
शान्ति का पाठ पढ़ाकर
विश्व विजय अभियान चलायें
आओ एक इतिहास रचाएं.
मानव सेवा धर्म बनाकर
सात्विकता जीवन मे लायें
जात-पात का भेद मिटाकर
आओ एक इतिहास रचाएं.
आतंकवाद के कठिन दौर मे
एक संकल्प अभियान चलाकर
मानवता का पाठ पढ़ाएं
आओ एक इतिहास रचाएं
भ्रष्ट आचरण की आंधी मे,
नैतिकता के दीप जलाकर
राम राज को फिर ले आयें
आओ एक इतिहास रचाएं.
जनसंख्या नियंत्रित करने को
निज देश समृद्ध करने को
शिक्षित समाज निर्माण कराएँ
आओ एक इतिहास रचाएं.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
9911323732

Saturday, July 24, 2010

आस्था के फूल

आस्था के फूल
आस्था के फूल कभी मुरझाते नहीं हैं.
लोग अपनों से छले जाते हैं जहाँ मे
छलने से फिर भी घबराते नहीं हैं.
आस्था को आधार बना आगे बढ़ाते जाते हैं
आस्था के फूल कभी मुरझाते नहीं हैं.
कुछ लोग बताते हैं "खुदा" खुद को मगर
"खुदा" की मौजूदगी को वो भी ठुकराते नहीं हैं.
तन्हाई मे करते हैं वो बंदगी "खुदा"की
आस्था के फूल कभी मुरझाते नहीं हैं.
साथ चलने की खाकर कसम,जिंदगी मे
रहबर छोड़ जाते हैं अक्सर मझधार मे.
इंतजार मे रहती आँखें खुली,मरते वक़्त
आस्था के फूल कभी मुरझाते नहीं हैं.
नए दोस्तों से बढाकर नजदीकियां
फिर नए रिश्ते हर पल बनाते हैं.
छलने वाले की बताते हैं मजबूरियां
आस्था के फूल कभी मुरझाते नहीं हैं.
Dr. A.Kirti vardhan
09911323732
http://kirtivardhan.blogspot.com/
"मुझे इंसान बना दो " किताब से
मूल्य १००/ रजिस्ट्री डाक से

Thursday, July 22, 2010

आधुनिक बेटी

आधुनिक बेटियां
आज बेटी हुनर बंद हो गयी है
पढ़ लिख कर पैरों पर खड़ी हो गयी है
जो होती थी निर्भर सदा दूसरों पर
आज माँ बाप का सहारा हो गयी है.
साहस से अपने दुनिया बदलकर
हर कदम पर बेटी विजयी हो गयी है.
क्या खोया क्या पाया,जरा यह विचारें
आज बेटी जहाँ मे बेटा हो गयी है.
वात्सल्य और मातृत्व सुख को भुलाकर
पैसों की दौड़ मे बेटी खो गयी है.
चाहती नहीं वह माँ बनना देखो
आज बेटी बंज़र धरती हो गयी है.
बनाये रखने को अपना शारीरिक सौंदर्य
बेटी ही भ्रूण की हत्यारिन हो गयी है.
चाहती आज़ादी सामाजिक मूल्यों से
आज बेटी खुला बाज़ार हो गयी है.
बिन ब्याह संग रहना और नशा करना
आधुनिक बेटी की शान हो गयी है.
जिस घर मे बेटी ब्याह कर गयी है
उस घर मे खड़ी दीवार हो गयी है.
थे प्यारे जो माँ बाप भाई बहन अब तक
आज निगाहें मिलाना दुशवार हो गयी है.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
09911323732

Sunday, July 11, 2010

माकन और घर

मकान और घर
जिस दिन मकान घर मे बदल जायेगा
सारे शहर का मिजाज़ बदल जायेगा.
जिस दिन चिराग गली मे जल जायेगा
मेरे गावं का अँधेरा छट जायेगा.
आने दो रौशनी तालीम की मेरी बस्ती मे
देखना बस्ती का भी अंदाज़ बदल जाएगा.
रहते हैं जो भाई चारे के साथ गरीबी मे
खुदगर्जी का साया उन पर भी पड़ जाएगा.
दौलत की हबस का असर तो देखना
तन्हाई का दायरा "कीर्ति" बढ़ता जाएगा.
उड़ जायेगी नींद सियासतदानो की
जब आदमी इंसान मे बदल जाएगा.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
९९११३२३७३२
www.kirtivardhan.blogspot.com

Sunday, July 4, 2010

जतन से ओढ़ी चदरिया

बुजुर्गों कि समस्याओं एवं समाधान पर केन्द्रित पुस्तक "जतन से ओढ़ी चदरिया" डॉ अ कीर्तिवर्धन द्वारा सम्पादित मूल्य ३००/
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५३,महालक्ष्मी एन्क्लेव ,मुज़फ्फरनगर-२५१००१ उत्तर प्रदेश
09911323732